क्या आपने कभी सोचा है कि 2025 में स्टेबलकॉइन का ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पेपाल को धूल चटा देगा, लेकिन फिर भी लोग रोजमर्रा की जिंदगी में क्रेडिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर पर ही निर्भर रहते हैं? वजह ये नहीं कि टेक्नोलॉजी कमजोर है, बल्कि कनेक्शन अभी तक सही से जुड़े नहीं हैं। लेकिन अच्छी खबर ये है कि अब ये रास्ता तेजी से बन रहा है, और भारत जैसे देशों में जहां UPI ने पेमेंट्स को क्रांति दी है, स्टेबलकॉइन भी वैसा ही बदलाव ला सकता है।

पिछले साल स्टेबलकॉइन के ट्रांजेक्शंस 46 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गए, और कुछ रिपोर्ट्स तो ये भी कहती हैं कि असली पेमेंट हिस्सा वीजा के आधे से ज्यादा हो चुका है। ये आंकड़े अब मजाक नहीं हैं; ये वीजा और ACH जैसे पुराने दिग्गजों के बराबर खड़े हैं। स्टेबलकॉइन अब क्रिप्टो की खिलौना नहीं रहा, बल्कि इंटरनेट की सबसे मजबूत सेटलमेंट लेयर बन गया है।

फिर भी लोग इसे बड़े पैमाने पर क्यों नहीं अपना रहे?

An isometric bridge connecting traditional banking systems to digital wallets using stablecoin technology.

सरल वजह ये है कि वॉलेट्स और बैंक, पेटीएम, गूगल पे जैसे रोजमर्रा के सिस्टम अभी भी अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। स्टेबलकॉइन ट्रांसफर तो सेकंडों में हो जाता है, फीस महज कुछ पैसे, लेकिन फिएट मनी को इंपोर्ट-एक्सपोर्ट करना या डायरेक्ट कार्ड से पेमेंट? वहां अटकाव आ जाता है।

लेकिन 2025 में ये कमी तेजी से भर रही है। कई कंपनियां अब ब्रिजिंग पर फोकस कर रही हैं।

  • सर्कल, रिपल, ब्रिज और BVNK जैसी कंपनियां लोकल पेमेंट नेटवर्क्स से सीधे जुड़ रही हैं। रीयल-टाइम बैंक ट्रांसफर, QR कोड स्कैनिंग, और लोकल क्लियरिंग सिस्टम सब कुछ शामिल है।
  • मास्टरकार्ड और वीजा भी मैदान में उतर आए हैं, पैक्सोस और स्ट्राइप के साथ मिलकर USDC और PYUSD जैसे स्टेबलकॉइन्स को अपनी कार्ड नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। अब मर्चेंट्स को क्रॉस-बॉर्डर बैंक अकाउंट्स की चिंता नहीं।
  • स्ट्राइप का ब्रिज प्लेटफॉर्म तो किसी भी बिजनेस को खुद का स्टेबलकॉइन इश्यू करने देता है, ऑनरैंप/ऑफरैंप वन-क्लिक में, वॉलेट और कार्ड टूल्स सब पैकेज्ड।

इसका नतीजा? क्रॉस-बॉर्डर वर्कर्स को सैलरी इंस्टेंट मिलती है, ग्लोबल मर्चेंट्स जीरो फॉरेक्स लॉस से पेमेंट लेते हैं, और ऐप डेवलपर्स यूजर्स को रीयल-टाइम रिवॉर्ड्स दे पाते हैं। स्टेबलकॉइन अब 'क्रिप्टो एक्सपेरिमेंट' से 'बैकग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर' बन गया है। आप ब्लॉकचेन यूज कर रहे हैं, ये महसूस भी नहीं होगा, जैसे आज UPI यूज करते हुए हम सर्वर्स के बारे में नहीं सोचते।

अब सोचिए आगे क्या होगा? जब एंट्री-एग्जिट चैनल्स पूरी तरह स्मूथ हो जाएंगे, स्टेबलकॉइन कई ट्रेडिशनल पेमेंट्स को रिप्लेस कर देगा। कल्पना कीजिए: कोई फ्रीलांसर USDC में पेमेंट लेता है और तुरंत लोकल करेंसी में कन्वर्ट कर खर्च करता है; छोटा दुकानदार QR स्कैन से ग्लोबल कस्टमर्स से पैसे लेता है, बिना बैंक फीस के जूझे।

टोकनाइजेशन: पुराने सिस्टम को कॉपी न करें, क्रिप्टो-नेटिव तरीके अपनाएं

Physical assets like gold and real estate being converted into secure digital tokens on a blockchain.

सब RWA (रियल वर्ल्ड एसेट्स ऑन-चेन) की बात कर रहे हैं। बैंक, एसेट मैनेजर्स और फिनटेक कंपनियां स्टॉक्स, बॉन्ड्स, कमोडिटीज और फंड्स को टोकनाइज करने की होड़ में हैं। 2025 में टोकनाइज्ड RWA मार्केट (स्टेबलकॉइन्स को छोड़कर) 180 बिलियन डॉलर को पार कर चुका है, जो साल की शुरुआत के 55 बिलियन से तेजी से बढ़ा।

लेकिन सच्चाई ये है कि ज्यादातर टोकनाइजेशन अभी 'डिजिटल कॉपी' जैसा है: ऑफ-चेन एसेट्स को लीगल व्रैपर में लपेटकर चेन पर डाल दिया जाता है। डिस्ट्रीब्यूशन आसान हो जाता है, लेकिन एफिशिएंसी में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।

असली मजा तो क्रिप्टो-नेटिव डिजाइन्स में है।

सिंथेटिक एसेट्स और परपेचुअल फ्यूचर्स (perps) ने अपनी ताकत साबित कर दी है। डीप लिक्विडिटी, 24/7 ग्लोबल ट्रेडिंग, और लिवरेज की आजादी। खासकर इमर्जिंग मार्केट्स के स्टॉक्स और कमोडिटीज के लिए सिंथेटिक एक्सपोजर ज्यादा फायदेमंद है। डायरेक्ट स्पॉट टोकनाइजेशन? वो तो रेगुलेटरी झंझट, थिन लिक्विडिटी और कंप्लायंस पिट्स से भरा है।

इसलिए सवाल ये नहीं कि 'पुराने एसेट्स को चेन पर कैसे शिफ्ट करें', बल्कि 'कौन से एसेट्स ब्लॉकचेन से री-इन्वेंट होने लायक हैं'।

2025 में परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट्स का क्रेज जारी रहेगा, खासकर RWA perps – सिंथेटिक तरीके से ट्रेडिशनल एसेट्स पर लिवरेज। ओस्टियम और हाइपरलिक्विड जैसे प्लेटफॉर्म्स का ट्रेडिंग वॉल्यूम अरबों में पहुंच गया है। क्यों पॉपुलर? क्योंकि एसेट होल्ड किए बिना 24/7 डायरेक्शन बेट कर सकते हैं, और लिक्विडिटी स्पॉट से बेहतर।

क्रेडिट: सिर्फ टोकनाइज न करें, चेन पर ही शुरू करें

स्टेबलकॉइन का स्केल बढ़ा है, लेकिन चेन पर क्रेडिट सिस्टम अभी कमजोर है। बिना सॉलिड लेंडिंग के, स्टेबलकॉइन सिर्फ 'डिजिटल कैश' बनकर रह जाता है, पैसे नहीं बढ़ा पाता।

अभी कई चेन-ऑन क्रेडिट प्लेटफॉर्म्स पुरानी ट्रिक यूज करते हैं: ऑफ-चेन लोन इश्यू कर टोकनाइज चेन पर। डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ता है, लेकिन कॉस्ट, कॉम्प्लेक्सिटी और थ्रेशोल्ड वही रहते हैं।

गेम चेंजर है चेन-ऑन नेटिव क्रेडिट ओरिजिनेशन। लोन स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स में डायरेक्ट क्रिएट, रिव्यू, डिस्बर्स और रीपेमेंट – सब ऑटोमेटेड। बैकएंड मैनुअल कॉस्ट आधी हो जाती है, ट्रांसपेरेंसी मैक्सिमम, और बॉरोअर्स-लेंडर्स का पूल विस्तारित।

हालांकि, कंप्लायंस और स्टैंडर्डाइजेशन चुनौतियां बनी हुई हैं। रेगुलेटर्स KYC और AML मांगते हैं, चेन पर कैसे? लेकिन 2025 में हाइब्रिड सॉल्यूशंस उभर रहे हैं: परमिशन्ड पूल्स, KYC-गेटेड वॉल्ट्स। आवे और कंपाउंड जैसे वेटरन्स भी कंप्लायंस मॉड्यूल्स ऐड कर रहे हैं। फ्यूचर का सस्टेनेबल चेन-ऑन क्रेडिट इकोनॉमी इन पेन-पॉइंट्स को सॉल्व करने पर टिकी है।

स्टेबलकॉइन कैसे ट्रेडिशनल बैंक्स का 'एक्सटेंशन' बने?

ट्रेडिशनल बैंक्स के कोर लेजर्स अभी भी पुराने सिस्टम्स पर चलते हैं। रिलायबल हैं, लेकिन रीयल-टाइम सेटलमेंट या प्रोग्रामेबल लॉजिक ऐड करना? सालों लगते हैं, और रेगुलेटर्स को मनाना पड़ता है।

स्टेबलकॉइन एक स्मार्ट बाईपास देते हैं: बैंक्स को कोर सिस्टम छेड़े बिना न्यू प्रोडक्ट्स लॉन्च करने का मौका – टोकनाइज्ड डिपॉजिट्स, टोकनाइज्ड ट्रेजरीज, चेन-ऑन बॉन्ड्स। इनोवेशन पैरेलल ट्रैक पर चलता है, पुराना सिस्टम सेफ रहता है।

फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस न्यू एक्सपेरिमेंट्स कर पाते हैं, रिस्क कंट्रोल्ड, स्केलिंग फास्ट। 2025 में वीजा, जेपीमॉर्गन जैसे जायंट्स स्टेबलकॉइन प्रीपेड्स और टोकनाइज्ड ट्रेजरीज टेस्ट कर रहे हैं। बैंक्स अब 'डिसरप्टेड' नहीं, बल्कि 'प्लेयर्स' हैं।

जब इंटरनेट खुद बैंक बन जाए

An AI agent performing automated financial transactions within a secure, encrypted privacy-preserving environment.

भविष्य में AI एजेंट्स हर जगह होंगे, सॉफ्टवेयर खुद डिसीजन लेंगे, ट्रांजेक्शन करेंगे। पेमेंट्स अब मैनुअल 'कन्फर्म' पर निर्भर नहीं रह सकते; ऑटो-ट्रिगर होने चाहिए।

स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स वैल्यू को ग्लोबल सेकंड-लेवल सेटलमेंट दे चुके हैं। न्यू पेमेंट प्रिमिटिव्स ट्रांसफर्स को रिएक्टिव और प्रोग्रामेबल बनाते हैं। एजेंट्स इंस्टेंट पेमेंट्स से डेटा, कंप्यूट पावर या API कॉल्स खरीद सकेंगे। ऐप्स में एम्बेडेड पेमेंट लॉजिक, लिमिट्स और ऑडिट्स डिफॉल्ट होंगे। प्रेडिक्शन मार्केट इवेंट्स पर ऑटो-सेटलमेंट।

पेमेंट्स अब अलग प्रोसेस नहीं, बल्कि नेटवर्क का इंस्टिंक्ट हैं। वैल्यू इंफॉर्मेशन की तरह फ्लो करेगी। इंटरनेट फाइनेंशियल को 'सपोर्ट' नहीं करेगा, वो खुद फाइनेंशियलाइज्ड हो जाएगा।

वेल्थ मैनेजमेंट: अमीरों का विशेषाधिकार से सबके लिए

पहले पर्सनलाइज्ड वेल्थ मैनेजमेंट सिर्फ हाई-नेट-वर्थ वाले लोगों के लिए था, कॉस्ट हाई, एंट्री बैरियर ऊंचा। अब चेन-ऑन टोकनाइजेशन और AI टूल्स ने बैरियर्स तोड़ दिए हैं।

एसेट्स चेन पर आने के बाद, AI ऑटो पोर्टफोलियो बिल्ड, रीबैलेंस और एडजस्ट करता है। DeFi फंड्स को हाई-यील्ड ऑपर्च्युनिटीज में स्मार्टली इन्वेस्ट करता है। स्टेबलकॉइन या टोकनाइज्ड मनी मार्केट फंड्स होल्ड करना बैंक सेविंग्स से बेहतर।

रिटेल इन्वेस्टर्स अब प्राइवेट क्रेडिट, प्री-IPO, प्राइवेट इक्विटी जैसी चीजों तक पहुंच सकते हैं। रिस्क स्पेक्ट्रम कवर, पोर्टफोलियोज ज्यादा डायनामिक, ट्रांसपेरेंट और लो-कॉस्ट।

AI एजेंट एरा: ह्यूमन्स से एजेंट्स तक

ह्यूमन यूजर्स कम हो रहे हैं, AI एजेंट्स बढ़ रहे हैं। वे वर्क करते हैं, डील्स नेगोशिएट करते हैं, ट्रेड करते हैं, लेकिन फाइनेंशियल सिस्टम्स उन्हें पहचानते ही नहीं।

कमी है एजेंट आइडेंटिटी की। क्रिप्टो क्रेडेंशियल्स चाहिए: ये किसके लिए है, क्या कर सकता है, प्रॉब्लम पर कौन जिम्मेदार। बिना इसके, प्लेटफॉर्म्स ब्लॉक कर देंगे।

ह्यूमन KYC की तरह, एजेंट KYC डिजिटल कॉमर्स का बेसिक इंफ्रा बनेगा। जीरो-नॉलेज प्रूफ्स (ZKP) परफेक्ट सॉल्यूशन: कंप्लायंस प्रूव बिना डिटेल्स शेयर किए। 2025 में ZKP-बेस्ड एजेंट आइडेंटिटी प्रोजेक्ट्स लॉन्च हो चुके हैं।

AI सिर्फ टूल नहीं, रिसर्च पार्टनर है

AI अब खुद प्रॉब्लम्स एक्सप्लोर करता है, हाइपोथेसिस बनाता है, न्यू इनसाइट्स देता है। ये डेड इंस्ट्रक्शंस फॉलो नहीं करता, बल्कि ब्रॉडथ और क्रिएटिविटी का मिश्रण है।

मल्टी-एजेंट सिस्टम्स एक-दूसरे को क्रिटिसाइज करते हैं, इटरेट करते हैं, आउटपुट वेरिफाई करते हैं। क्रिप्टो इन एजेंट नेटवर्क्स को कोऑर्डिनेट, अट्रिब्यूट, पेमेंट्स को वेरिफायबल बनाता है, इंसेंटिव्स अलाइन। कोलैबोरेटिव AI रिसर्च लैब्स से चेन-ऑन इंसेंटिवाइज्ड प्रोसेस बन जाएगा।

प्राइवेसी: क्रिप्टो का सबसे मजबूत लॉन्ग-टर्म मोट

ब्लॉकचेन डिफॉल्ट पब्लिक ट्रांजेक्शंस हैं, रियल-वर्ल्ड फाइनेंशियल यूज केसेज में फिट नहीं बैठते। प्राइवेसी सिस्टम्स में यूजर्स शिफ्ट हो जाएं, तो स्विचिंग कॉस्ट स्काई-हाई – मेटाडेटा लीक रिस्क बहुत बड़ा।

परफॉर्मेंस गैप कम हो रहा है, फीस जीरो की ओर, तो प्राइवेसी ही अंतिम विनर का फैक्टर बनेगी। ZKP मैच्योर हो चुके हैं, प्रूफ जेनरेशन मिनट्स से मिलीसेकंड्स तक। एज्टेक, लिनिया जैसे प्राइवेसी चेन्स का TVL आसमान छू रहा है।

डिसेंट्रलाइज्ड मैसेजिंग भी उभर रही है। कोई सेंट्रल सर्वर या ऑपरेटर नहीं, ओपन प्रोटोकॉल्स + स्ट्रॉन्ग क्रिप्टो (क्वांटम-रेजिस्टेंट)। यूजर्स कीज कंट्रोल करते हैं, मैसेजेस और आइडेंटिटी हमेशा उनके पास।

कीज को इंफ्रा बनाएं, प्रोग्रामेबल प्राइवेसी

ऐप्स सेंसिटिव डेटा पर डिपेंडेंट हो रहे हैं, लेकिन प्राइवेसी ज्यादातर ऐप-लेयर पर अटकी है। रेगुलेटेड इंडस्ट्रीज, एजेंट सिस्टम्स सहन नहीं कर पाते।

चाहिए चेन-ऑन एनफोर्स्ड डिसेंट्रलाइज्ड की मैनेजमेंट: क्रिप्टो रूल्स डिफाइन करें कि कौन, किन कंडीशंस पर, कितने समय के लिए डेटा डिक्रिप्ट कर सकता है। प्राइवेसी 'पैच' से इंटरनेट का बेसिक लेयर बनेगी।

'कोड इज लॉ' से 'नॉर्म्स इज लॉ' तक

सिर्फ ऑडिटिंग काफी नहीं, वल्नरेबिलिटीज नए तरीकों से आती रहती हैं। मैच्योर सिस्टम्स सिक्योरिटी इनवैरिएंट्स को रनटाइम में कोड करें। कोर अट्रिब्यूट्स वायलेट करने वाले ट्रांजेक्शंस ऑटो-रिजेक्ट।

सिक्योरिटी पैसिव फिक्स से प्रिंसिपल-बेस्ड एक्टिव डिफेंस बनेगी। अटैक स्पेस ड्रास्टिकली कम।

प्रेडिक्शन मार्केट्स: सिर्फ बेटिंग नहीं, न्यू सिग्नल लेयर

प्रेडिक्शन मार्केट्स ज्यादा फाइन, कॉन्ट्रैक्ट्स डिटेल्ड, रिजल्ट्स ग्रेन्युलर, ऑड्स रीयल-टाइम। ये दुनिया समझने का दूसरा आईना बन गए हैं।

डिस्प्यूटेड रिजल्ट्स? डिसेंट्रलाइज्ड गवर्नेंस + AI ओरेकल्स ट्रुथ सेटलमेंट में मदद करेंगे। AI एजेंट्स मार्केट्स में ट्रेडिंग से न्यू पैटर्न्स, इनसाइट्स खोजेंगे।

ये पोल्स या एनालिसिस को रिप्लेस नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें शार्प बनाएंगे – बिलीफ्स एग्रीगेट, इंसेंटिव्स, इंफो।

स्किन-इन-द-गेम मीडिया: क्रेडिबिलिटी को स्टेक्स से प्रूव करें

AI-जनरेटेड कंटेंट फ्लड हो रहा है, क्रेडिबिलिटी डिसर्न करना मुश्किल। क्रिएटर्स टोकनाइज्ड स्टेक्स, लॉकिंग, प्रेडिक्शन मार्केट्स से अपनी ओपिनियंस पब्लिकली कमिट करेंगे।

क्रेडिबिलिटी 'न्यूट्रल' क्लेम नहीं, बल्कि 'स्टेक' दिखाने से आएगी। ये ओल्ड मीडिया को रिप्लेस नहीं करेगा, लेकिन सॉलिड ट्रस्ट सिग्नल ऐड करेगा।

क्रिप्टो प्रिमिटिव्स चेन से बाहर: वेरिफायबल कंप्यूटेशन

ZKP एडवांसमेंट्स से ऑफ-चेन कंप्यूटेशन भी वैलिड प्रूफ्स जेनरेट कर सकता है। ओवरहेड कम, परफॉर्मेंस हाई, वेरिफायबल क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑडिटेबल AI एक्जीक्यूशन, डिस्ट्रिब्यूटेड ट्रस्ट मॉडल्स अनलॉक। ऐप्स री-राइट न करें।

ट्रांजेक्शंस मीन्स हैं, एंड नहीं

कई क्रिप्टो कंपनियां ट्रांजेक्शन फीस पर सर्वाइव करती हैं, लेकिन लॉन्ग-टर्म मोट वीक। सच्ची स्ट्रेंथ डिफरेंशिएटेड इंफ्रा, प्लेटफॉर्म्स, सर्विसेज बिल्ड करने में है, जो लास्टिंग वैल्यू क्रिएट करें।

लीगल फाइनली टेक को कैच-अप कर रहा है

पहले अनसर्टेन लीगल्स ने नेटवर्क्स को कॉर्पोरेट शेल्स में कैद किया, ट्रांसपेरेंसी दबाई, गवर्नेंस रिस्क-ड्रिवन।

क्लियर रेगुलेशंस आने पर, नेटवर्क्स ट्रूली ओपन, कंपोजेबल, डिसेंट्रलाइज्ड, ट्रस्टेड न्यूट्रल बन सकेंगे। ब्लॉकचेन पोटेंशियल फुली अनलीश।

एक लाइन में समरी

क्रिप्टोकरेंसी अब कोइन ट्रेडिंग या इश्यू करने से आगे निकल गया है। ये इंटरनेट का वैल्यू लेयर, कोऑर्डिनेशन लेयर, आइडेंटिटी लेयर, प्राइवेसी लेयर बन रहा है।

स्टेबलकॉइन सीमलेस पेमेंट्स इंटीग्रेशन, चेन-ऑन क्रेडिट ओरिजिनेशन, एजेंट्स का ऑटोनॉमस ट्रेडिंग, प्राइवेसी कोर कॉम्पिटिटिव एज... फाइनेंशियल 'मैनुअल' से 'सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड' प्रोसेस बनेगा।

फाइनेंशियल गायब नहीं होगा। वो एयर की तरह डिफॉल्ट चलेगा।

क्या आप इस 'सीमलेस फाइनेंशियल' एरा के लिए तैयार हैं?

फ्यूचर शुरू हो चुका है, बस ज्यादातर लोग अभी सही चैनल पर नहीं स्विच्ड।

 

ग्लोबल टॉप 3 क्रिप्टो एक्सचेंजेस की सिफारिश:

बिग एंड कंप्लीट के लिए बिनेंस, प्रोफेशनल प्लेज के लिए OKX, आल्टकॉइन्स के लिए गेट! जल्दी रजिस्टर करें और लाइफटाइम फीस डिस्काउंट एंजॉय करें~